मंगलवार, 5 अप्रैल 2022

माँ कूष्माण्डा जी की आरती । Maa Kushmanda Ji ki Aarti Lyrics

नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्माण्डा जी का उपासना किया जाता है। माँ अपने आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र, गदा तथा सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला धारण करती हैं। माँ सिंह की सवारी करती हैं।

Navratri ke chauthe din gaye jane wala Aarti
Photo By Jonoikobangali - अपना काम, CC BY-SA 3.0,

चौथा जब नवरात्र हो, कूष्मांडा को ध्याते।
जिसने रचा ब्रह्मांड यह, पूजन है उनका॥

आद्य शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप।
इस शक्ति के तेज से कहीं छांव कहीं धूप॥

कुम्हड़े की बलि करती है तांत्रिक से स्वीकार।
पेठे से भी रीझती सात्विक करें विचार॥

क्रोधित जब हो जाए यह उल्टा करे व्यवहार।
उसको रखती दूर मां, पीड़ा देती अपार॥

सूर्य चंद्र की रोशनी यह जग में फैलाए।
शरणागत की मैं आया तू ही राह दिखाए॥

नवरात्रों की मां कृपा कर दो मां
नवरात्रों की मां कृपा करदो मां॥

जय मां कूष्मांडा मैया।


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